कुश लव रामायण गाती

Lyrics : ग. दि. माडगूळकर
Music : सुधीर फडके
Singer : सुधीर फडके
Type : भावगीते
Source : माहिती व नभोवाणी मंत्रालय, भारत सरकार
श्रीरामचंद्राच्या अश्वमेध यज्ञासाठी अयोध्येंत माणसांचा महासागर जमला होता. तापस वेष धारण केलेले दोन बटु मंडपांत आले. ते म्हणाले “आम्ही महर्षि वाल्मीकींचे शिष्य आहोंत. आम्ही रामचरित्रगायन करतो.” श्रीरामांना माहीत नव्हतें की आपल्यासमोर आपल्या चरित्राचें गायन करणारे हे बटु आपलेच पुत्र आहेत.
स्वयें श्रीरामप्रभू ऐकती
कुश लव रामायण गाती
कुमार दोघे एक वयाचे
सजीव पुतळे रघुरायाचे
पुत्र सांगती चरित पित्याचे
ज्योतिनें तेजाची आरती
राजस मुद्रा, वेष मुनींचे
गंधर्वच ते तपोवनींचे
वाल्मीकींच्या भाव मनींचे
मानवी रूपें आकारती
ते प्रतिभेच्या आम्रवनांतील
वसंत-वैभव-गाते कोकिल
बालस्वरांनी करुनी किलबिल
गायनें ऋतुराज भारिती
फुलांपरी ते ओठ उमलती
सुगंधसे स्वर भुवनीं झुलती
कर्णभुषणें कुंडल डुलती
संगती वीणा झंकारिती
सात स्वरांच्या स्वर्गामधुनी
नऊ रसांच्या नऊ स्वर्धुनी
यज्ञ-मंडपीं आल्या उतरुनी
संगमी श्रोतेजन नाहती
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